
गाडरवारा काली कमाई का कुबेर निकला पूर्व नगर पालिका अधिकारी! गाडरवारा में EOW का महा-एक्शन, रिटायर्ड होते ही फूटा पाप का घड़ा…..
काली कमाई का कुबेर निकला पूर्व नगर पालिका अधिकारी! गाडरवारा में EOW का महा-एक्शन, रिटायर्ड होते ही फूटा पाप का घड़ा
नरसिंहपुर/गाडरवारा।
जनता के पैसों पर डाका डालकर अपनी तिजोरियां भरने वाले भ्रष्टाचारियों के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में जैसे ही EOW की टीम ने दस्तक दी, पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। सरकारी सेवा की आड़ में करोड़ों की बेनामी संपत्ति खड़ी करने वाले नगर पालिका के पूर्व सहायक निरीक्षक योगेंद्र ढिमोले के पापों का घड़ा आखिरकार उनकी सेवानिवृत्ति के महज एक महीने बाद ही फूट गया है।
शिकंजा: तड़के पहुंची 20 सदस्यीय टीम, खंगाला जा रहा साम्राज्य
जबलपुर EOW की 15 से 20 सदस्यीय विशेष टीम ने MPEB कॉलोनी स्थित योगेंद्र ढिमोले के आलीशान निवास पर तड़के ही छापा मार दिया। आय से अधिक संपत्ति की ठोस शिकायत मिलने के बाद की गई इस कार्रवाई ने आरोपी अधिकारी को संभलने तक का मौका नहीं दिया।
काली कमाई का खुला कच्चा चिट्ठा: आलीशान बंगले, कारें और अकूत संपत्ति
प्रारंभिक जांच और छानबीन में जो सच सामने आया है, उसने सबके होश उड़ा दिए हैं। एक अदने से पद पर रहने वाले इस अधिकारी ने अपनी काली कमाई से एक पूरा साम्राज्य खड़ा कर लिया था। जांच में अब तक निम्नलिखित संपत्तियों का खुलासा हुआ है:
आलीशान हवेलियां: गाडरवारा में स्थित दो मंजिला करोड़ों का बंगला और लखनादौन में एक आलीशान मकान।
जमीन-जायदाद: लखनादौन में एक खाली प्लॉट और दो कृषि भूमि।
व्यापार और वाहन: बेटे के नाम पर एक दुकान, महंगी गाड़ियों का शौक पूरा करने के लिए एक थार (Thar), एक कार, तीन मोटरसाइकिलें और एक ट्रैक्टर-ट्रॉली।
नगदी और सोना-चांदी: घर के अंदर भारी मात्रा में नगदी और सोने-चांदी के जेवरात मिलने की जानकारी सामने आई है, जिनका इस समय मूल्यांकन और भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।
लखनादौन से गाडरवारा तक फैला था प्रभाव
आरोपी योगेंद्र ढिमोले का इतिहास भी बेहद रसूखदार रहा है। वह पहले लखनादौन में सीएमओ (CMO) का प्रभार भी संभाल चुके हैं और बाद में गाडरवारा नगर पालिका में पदस्थ रहे। इसी वर्ष 1 अप्रैल को वे सहायक निरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। पद का दुरुपयोग कर जनता की गाढ़ी कमाई को निजी तिजोरी में तब्दील करने का खेल लंबे समय से चल रहा था।




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